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कक्‍काजी कहिन

ब्‍लाग पढ़-पढ़ जुग मुआ ब्‍लागरिया भया न कोय। ढाई अक्षर कक्‍काजी का पढ़े सो ब्‍लागरिया होय।।

रविवार, 2 दिसंबर 2007

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